Sunday, September 4, 2011

_______ग़ज़ल



मैं भयानक कवितायें पढ़ने लगा हूँ
पर अपने साये से भी डरने लगा हूँ |

है कोई खुदा यहाँ जो मुझे उठा सके
मैं अमर हूँ अहसास करने लगा हूँ |

इशारों पर चलना समझदारी तो नहीं
पर मैं तो नींद में भी चलने लगा हूँ |

प्यार में हद से गुजर जाना ठीक नहीं
मैं खुद किसी की आँखों में पलने लगा हूँ |

मुश्किल से उसको दर्द में हसाया मैंने
मैं खुद अब उस  दर्द से गुजरने लगा हूँ |

__________हर्ष महाजन