Monday, September 19, 2011

कर्मों का हासिल

मेरी तहरीरों को मिटाना इतना आसां नहीं
ये मेरा यकीन है कोई दिल का गुमाँ नहीं |

चुप जुबां से जो तुमने चाहा कदर की मैंने
ये तेरे कर्मों का हासिल है मेरा ईमान नहीं |

_________हर्ष महाजन
४.०८.२०११