Sunday, September 4, 2011

चाहता तो बहुत हूँ

तू बहुत उदास है
तुझे अब मनाऊँ कैसे
चाहता तो बहुत हूँ
पर दोस्त 
तुझे
हाथों की लकीरों में
सजाऊँ कैसे !!!!!!!!

हर्ष महाजन