Monday, September 5, 2011

एक लाश




_____रूह चली आज
अपने घर को
छोड़ चली इक
सुरीले स्वर को
_____दूंद्ती है ....
वो मजबूत कांधा
बड़ी महरबानी उनकी
जिन्होंने
जिस्म को
मजबूती से बाँधा........!!!!

_______क्या इसलिए..????
कहीं ये उठ न जाए ...?
या यूँ  कहिये.......
-----गणित कहीं ......
जायदाद- खोरों का !!!
बिगड न जाए !!!!!

____शीघ्रता छा जाए....!!!
सिर्फ रोने का शगुन भर
रह जाए  !!!!!
सब की नज़रें ....
उस बे-जान लाश पर ..
जो पड़ी है यूँ ही
अपनों के विश्वास पर !!!
रूह उसकी टहल रही है
सुन रही है
अपनों के ताने-बाने ...!
बुन रहे हैं जो
रहे थे कभी........
जाने पहचाने और सयाने .....
पुकार रहे हैं
उस बे-जान पड़ी लाश को 
____अरे ओ ~~~~~
कहाँ छुपा रखा है ?
करारनामा !!!!
बड़ा ही खूंसठ था ये बुड्डा
बड़ा ही था खिस्याना ~~~
जाते हुए भी
नहीं बता गया
उसका ठिकाना ?
बे-रहम ...बे-हया !!

___________बीवी गुर्रायी
इधर-उधर देख चिल्लायी ~~~~
ज़रा जल्दी करो !!!!!!
लाश पेट से फूल आयी!!!!!
_____बाद में समझ आयी
उसे तो बिलकुल ...उदास और
.....चुप रहना है |
वो भूल गयी थी
इक पति-व्रता इस्त्री का
यही तो  इक गहना है ...!!

____रूह ने ली
इक बे-जान सी अंगडाई .....
इक बूँद  !!!!!
सूक्ष्म आँखों से
खुद-ब-खुद
चली आयी

इक बूँद  !!!!!
सूक्ष्म आँखों से
खुद-ब-खुद
चली आयी |
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हर्ष महाजन