Sunday, November 6, 2011

ऐ खुदा तेरे शहर में इंसान न मिलेगा

ऐ खुदा तेरे शहर में इंसान न मिलेगा
रावण को मार सके तीर-कमान न मिलेगा |

बिकेगा सब ईमान ज़ब्त होगी वफ़ा भी
इंसान के इस शहर में इन्सान न मिलेगा |

हमने तलाश-ए-यार में बितायी उम्र ये,
मालूम न था यार क्या बे-ईमान न मिलेगा |

ये उम्र इसी हाल में कट जायेगी शायद
अब दर्द में जीने का सामान न मिलेगा |

ऐ खुदा तेरे बन्दों का क़त्ल इस तरह होगा,
दफनाने को ज़मीं पे कब्रीस्तान न मिलेगा |

सोचा तेरे शहर में तुझ सा  ही मिलेगा
न अश्क तेरी आँखों में तूफ़ान न मिलेगा |

___________हर्ष  महाजन