Sunday, November 13, 2011

तनहायी तबस्सुम लिए घूमती रही

तनहायी तबस्सुम लिए घूमती रही
जुदायी राज़ इसके सभी दूंद्ती रही
मुहब्बत का 'हर्ष' यही अंजाम होता है
रात लबालब आंसू लिए झूमती रही |

__________हर्ष महाजन