Thursday, December 1, 2011

ग़ज़लों की सूरत में तुझे मिलना चाहता हूँ

ग़ज़लों की सूरत में तुझे मिलना चाहता हूँ
तसव्वर में तेरे, फूलों सा खिलना चाहता हूँ |

उम्र बीत जायेगी यूँ ही शब्दों में घुलते-घुलते
तेरी हर तहरीर में मक्ता बन ढलना चाहता हूँ |

__________हर्ष महाजन