Monday, February 20, 2012

मुझको मेरी उन वफाओं का हिसाब ले लेने दे

मुझको मेरी उन वफाओं का हिसाब ले लेने दे
मेरे कुछ अनकहे सवालों का जवाब ले लेने दे ।

न कह अलविदा अभी अपनी ज़िन्दगी से मुझे
कुछ शेर कहे हैं तेरे लिए वो किताब ले लेने दे ।
गुनगुनाने दो मुझे मेरे तलख शेरों को कुछ देर
उनकी हसीं आँखों से उबलते ख्वाब ले लेने दे ।

पेशानी पे जो दाग दिए तूने नज़र तो नहीं आते
छुपाया जो तूने बे-वफायी का खिताब ले लेने दे।

सोने से पहले ऐ दिल मेरी इल्तजा है तुझ से
शाम-ए-ज़िन्दगी से पहले कुछ शबाब ले लेने दे ।


___________________हर्ष महाजन