Thursday, March 8, 2012

'हर्षा' सब के मन खड़ा काटे सबका ज़हर

'हर्षा' सब के मन खड़ा काटे सबका ज़हर 
 मनवा काले सींच कर शब् में भर दे सहर ।
शब् में भर दे सहर, करे अब दूर छलावे ,
दिल में हो कुछ बैर , सभी को दूर भगावे ,
कहे 'हर्ष' कविराय , खुदा से कर दो वर्षा ,
बैर करेगी हरण , तो खुश होवेगा हर्षा ।

हर्ष महाजन
०४/०३/२०१२