Friday, March 23, 2012

माँ तुझको देखा ही नहीं, तू दे अपना अवतार कभी

माँ तुझको देखा ही नहीं, तू दे अपना अवतार कभी
ये दुनिया अजब निराली है मिलने न दे तेरा साथ कभी ।
जब ज्योत जलायी तूने माँ दुनिया से रिश्ता टूट गया,
मैं दर-दर तुझको देखूं माँ तू दिखा दे अपना द्वार कभी ।
तू हर तन जोड़े जगदम्बे तेरे प्यार कि कीमत मुझ पे नहीं
मैं पापी जुल्मी राही हूँ तू हर ले सभी मेरे खार कभी ।
माँ तुझको देखा ही नहीं, तू दे अपना अवतार कभी
ये दुनिया अजब निराली है मिलने न दे तेरा साथ कभी ।

___________________हर्ष महाजन