Tuesday, March 13, 2012

ज़िन्दगी को काज़ल क्यूँ बना डाला 'हर्ष'

ज़िन्दगी को काज़ल क्यूँ बना डाला 'हर्ष'
काबिल-ए-बर्दाश्त न होगा उन आँखों को ।

__________________हर्ष महाजन