Wednesday, May 9, 2012

माँ तुझको देखा ही नहीं

..

__________माँ

माँ तुझको देखा ही नहीं
तू दे अपना अवतार कभी
ये दुनिया अजब निराली है
करती न मुझे क्यूँ प्यार कभी --------------2

न मिलता पिता का प्यार मुझे
न मिले दुनिया का दुलार मुझे
संग ले जा मुझको तू अपने
या सपनों में दे आकार कभी ।

यूँ पल-पल टूटे दिल अपना
क्यूँ दिल की कीमत कुछ भी नहीं ,
क्या भूखे बिलखते मर जाएँ
क्यूँ खुले
न किसी का द्वार कभी ।-------------2

बस ज़ुल्मों की बरखा सहते हम,
अपनी कोई पतवार नहीं,
यूँ अश्क बहें अखियन से सदा
दामन में जो ले गमख्वार नहीं ।--------------२

माँ तुझको देखा ही नहीं
तू दे अपना अवतार कभी

________हर्ष महाजन ।


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मेरी किताब से 2005