Thursday, May 10, 2012

काश ! मुझे तू माँ कभी धोखा नहीं देती

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काश ! मुझे तू माँ कभी धोखा नहीं देती,
तेरी मैं कोख़ को शिकवों का मौका नहीं देती ।

किस नाज़ से ढूँढा था बेटी ने तेरा चोला
मगर यूँ डँस के मुझको काश तू चौंका नहीं देती ।
गिरी मैं तेरे दामन से खुदा से क्या करूँ शिकवा
भटकती हूँ मैं जन्मों से नदी नौका नहीं देती ।

इक माँ ने जब-जब कोख़ को इस तरह उजाड़ा है
स्रष्टि कहर से बचने का कोई मौका नहीं देती



____________________हर्ष महाजन ।