Monday, May 21, 2012

ये चिराग जहां रहेगा रौशन रहे ज़माना

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ये चिराग जहां रहेगा रौशन रहे ज़माना
इस ज़िन्दगी को अब यूँ गुलशन कहे ज़माना ।

छा जाए जो माहौल पर खामोश सा अँधेरा
रौशन हुआ चिराग तो गुलबदन कहे ज़माना ।

डरता नहीं 'हर्ष' कभी बस खौफ है खुदा का
मायूस है दिल मगर अब दर्पण कहे ज़माना ।

ये ज़रूरी नहीं वफ़ा का दें जवाब हम वफ़ा से
गर बन जाएँ वो मेरे तो रौशन कहे ज़माना ।

___________हर्ष महाजन ।