Saturday, June 23, 2012

हमने तो बे-सबब यादों के ज़खीरे सजा रखे हैं 'हर्ष'

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हमने तो बे-सबब यादों के ज़खीरे सजा रखे हैं 'हर्ष'
फ़क़त इक बात ही तो याद नहीं कि बस कहाँ रखे हैं ।

__________________हर्ष महाजन ।




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कुछ देर और बहारों का लुत्फ़ ले लें मेरे दोस्त
मौसम का मिजाज़ अभी बदलने वाला है बस ।
कुछ भी पोशीदा नहीं रहा अहले नज़र से 'हर्ष'
बड़ी मुश्किल से कुछ देर और टाला है बस ।

___________________हर्ष महाजन ।

पोशीदा = छुपा
edited 5/09/2012