Saturday, June 23, 2012

मुझको जीने का खुदा आके सलीका दे दे

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मुझको जीने का खुदा आके सलीका दे दे
मैं मोहब्बत में हूँ कोई आके तरीका दे दे ।

जिससे है प्यार मुझे उसके फ़साने हैं बहुत
ऐ खुदा चुपके से ज़ख्मों का ज़खीरा दे दे ।

ये तो दुनिया ने है झाँका मेरे दिल में यूँ ही
कोई अब राज़ मोहब्बत का लचीला दे दे ।

उसने था कत्ल किया फिर भी टुकड़े-टुकड़े जिया
अर्ज़ इतनी है खुदा दिल भी फकीरा दे दे ।

मुझको दिन रात सताती है अब सूरत उसकी
मैं बसूँ दिल में उसके ऐसा सलीका दे दे ।

_______________हर्ष महाजन ।