Tuesday, June 19, 2012

Ek Geet----मेरे साए की है छाँव

Ek Geet

मेरे साए की है छाँव,
सर पे धूप नीचे पाँव,
धरती पे है झूठा बसेरा
फिर गगन करे शामिल अँधेरा ।
रात ख्वाबों में कट जाती,
दिन में यादें फिर रुलाती,
बादलों में है बरखा का डेरा,
चंद अश्कों ने आके मुझे छेड़ा ।
मेरे साए की......

___हर्ष महाजन