Friday, August 3, 2012

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मंजिल को तलाश है एक ऐसे हुस्न की, जो उसके होने की तसदीक कर दे
वो कसीदे पढता रहा उसकी चाह में, शायद यही वज़ह उसे नज़दीक कर दे ।

_______________________________हर्ष महाजन ।