Saturday, August 4, 2012

मेरे दिल की बातें जो कागज़ पे थीं

_________एक गीत

मेरे दिल की बातें जो कागज़ पे थीं, 
दर्द-ए-दिल में असुअन से खाए नमीं ।
गम-ए-फुर्कत से न निकले कोई हल,
जब तक न बनेगी कोई दिल पे ज़मीं ।
मेरे दिल की बातें ............

मुझको मालूम है तू होगा फनां,
मेरे बिना तुझको भी जानां कहाँ ।
शिकायतें तो तुझको ज़माने से थीं, 
जाने फिर क्यूँ ढूंढें है मुझमें कमीं । 
मेरे दिल की बातें..........
 
अब तो लुत्फ़-ए-ज़न्नत गली में तेरी,
दिल में कलियाँ खिल गयीं अब मेरी ।
बुलंदी पे तारों की छाँव घनीं,
पाँव नीचे होगी कोई ज़मीं ।
मेरे दिल की बातें..........

मैं हक पे हूँ तो गम है किस बात का,
मुखालिफ ये दुनियाँ तो डर भी है क्या ।
रूह मेरी कातिल तिरे गम में सनीं,
खुदा के लिए अब तू कर ले यकीं ।
मेरे दिल की बातें..........
 

__________हर्ष महाजन


*************
गम-ए-फुर्कत=जुदाई
*************