Friday, September 21, 2012

क्या कहें शायरों की महफ़िल से ही नाता हो गया

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क्या कहें शायरों की महफ़िल से ही नाता हो गया
लफ्ज़ आते ही जुबां पर शायरी का ताँता हो गया |

उम्र बीती तन्हाई में बीच सब लोगों के साथ
जब चले अहसास कलम से दुनियाँ का काँटा हो गया |

जब लिखे किरदार उनके 'आस्तीन के सांप' जो थे
सारा जहां फिर हुआ मुखालिफ मेरा भी नाता हो गया |

तेरी बक्शी दुनियाँ में अब खुदगर्जी के सिवा है क्या
क्या लिखूं हर रुह है बेबस मेरे मगज़ का फाँका हो गया |

खुद्दारी और वफ़ा को जब से किताबों में लिखने लगा,
खुदगर्ज़ कहें फिर दुश्मनों से मेरा भी टाँका हो गया |

_____________________हर्ष महाजन