Saturday, September 29, 2012

मैं तो इक नन्नी सी जाँ देस तेरे आयी हूँ



प्यारी नन्ही सी "आन्या" के लिए एक प्यार भरी कविता
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आन्या अपनी माँ से मुखातिब --------
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मैं तो इक नन्नी सी जाँ देस तेरे आयी हूँ
मुझको तू सींच ले आँखों से तेरी जायी हूँ |

मुझको डर था कि खुदा देगा मुझे कैसी माँ,
तेरे आँचल में सिमट कर ही मैं मुस्कायी हूँ |

मैं हूँ छोटी सी मगर दुनिया के गम तू जाने
कुछ दिन तू ठहर ज़रा ऐसा हल मैं लायी हूँ |

टपकेंगी बूँदें तेरी आँख से पढ़ते ही इसे,
तेरे पास आने को पहले बहुत इतरायी हूँ |

तेरी दुनिया में रखा पहला कदम तो देखा,
ये तो अंगना-ए-बाबुल है फिर मैं परायी हूँ |

मुझको जो नाम दिया तूने तो जग 'आनू ' कहे
मुझको लगता है यहाँ सदियों से मैं छायी हूँ |

_______________हर्ष महाजन