Saturday, September 8, 2012

मुहब्बत पे न तू सवाल कर


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मुहब्बत पे न तू सवाल कर,
जो तेरा नहीं न ख्याल कर |

जो ख्याल तुझ में न रुक सका ,
उसे जाने दे न मलाल कर |

अपनों के ले के तू रंज-ओ-गम
खुद को न अब तू निढाल कर |

उस बे-वफ़ा की तू कब्र पर  ,
अब जला के शम्मा कमाल कर |

जब ज़बीं पे दाग़ हो सजदे का
तो ये ज़िन्द अपनी मुहाल कर |

जिसने नज़र से गिरा दिया ,
बेनकाब कर फिर हलाल कर |

जो बिछुड़ गया वो नसीब था
जो मिला तुझे न सवाल कर |

________हर्ष महाजन |