Saturday, October 20, 2012

मेरे अश्कों की कदर अब यहाँ कहाँ

...

मेरे अश्कों की कदर अब यहाँ कहाँ,
जो गिरें जाने यहाँ अब कहाँ कहाँ |

हम वफ़ा करके भी तनहा हैं खड़े,
कैसे रुक पाएगी अब ये जुबां कहाँ |

मेरी साँसें हैं सफ़र पर अब तलक
ज़िंदगी अपनी मगर अब जवां कहाँ |

क़ैद थे आंसू जो खुद बहने लगे,
काला-काला उठ रहा अब धुआँ कहाँ |

तेरी उल्फत मुझको तडपाये यहाँ
मुझको लगता प्यार मेरा रवाँ कहाँ |

___________हर्ष महाजन