Wednesday, October 24, 2012

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना यहाँ भी इक दिल धड़कता है

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ऐ चाँद तू उसे इतना कहना यहाँ भी इक दिल धड़कता है,
तू तो बस्ता है दूर इतना यहाँ पे आँखों से लहू बरसता है |

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना क्यूँ उदास है गैरों में हंस कर,
बरसों पहले छोड़ा जिसे वो अब भी तेरे आस-पास बस्ता है |

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना क्यूँ राज़ करता है किसी दिल पर
जब तू गुज़रता है किसी दर्द से वो पलपल मुझसे वाबस्ता  है |

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना हमें तुमसे कोई भी शिकायत नहीं,
कुछ गलतफहमियां हैं जिसमें बगावत का अहसास सलता है|

ऐ चाँद तू उसे इतना कहना क्यूँ आया था वो मैदान-ए-इश्क में,
मैं अब तलक घायल हूँ दिल पे वो ज़ख्म अभी तक खलता है |

____________________हर्ष महाजन