Saturday, October 6, 2012

मैं तो वाकिफ हूँ गम-ए-हिज्र से बताऊँ कैसे

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मैं तो वाकिफ हूँ गम-ए-हिज्र से बताऊँ कैसे,
वो तो खुश हैं उन्हें गम ये मैं सुनाऊँ कैसे |

उनकी हरक़त ने किये दिल के हजारों टुकड़े,
कोई बता दो इन्हें दामन में सजाऊँ कैसे |

तन्हा रातों में तसव्वुर से जुदा कैसे करूँ
जो जुदा मुझसे मुक़द्दर मैं बनाऊं कैसे |

वो तो धडके हैं मेरे दिल में हर पल यारब
जो दीया दिल में जला कब्र पे जलाऊँ कैसे |

मेरे हाथों से लकीरों का किया तुमने गबन,
इनको चेहरे पे सजाओं सा दिखाऊँ कैसे |

उनकी यादों का ये आलम कि नीदें भी सज़ा
अपनी आँखों को मैं रातों में जगाऊँ कैसे |

_______________हर्ष महाजन