Sunday, October 7, 2012

ज़िंदगी की ये सच्चाई कोई समझेगा नहीं

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ज़िंदगी की ये सच्चाई कोई समझेगा नहीं ,
जब तलक पाये न खुदा को समझेगा नहीं |
यहाँ अपनी ही तमन्नाएं उस पर काबिज हैं,
जब तलक गुजरे न खुद पे वो समझेगा नहीं |

इतना अहसान किया खुद खुदा ने सब पे यूँ ,
खुद आये दिया नाम पर कोई समझेगा नहीं |
इतनी आसान दी तरकीब खुदा को पाने की ,
पर ये मन है कि समझाने पे समझेगा नहीं |

अब कितना भी करो विलाप दुनिया के आगे,
अब खुदा भी बिन मेहनत अब समझेगा नहीं |
कुछ दें वक़्त खुदा को अपनी ज़िन्द के वास्ते,
गर यूँ हि करें पर्यास खुदा भि समझेगा नहीं |

_______________हर्ष महाजन