Tuesday, October 9, 2012

मुझको वो मेरे गुनाहों की सज़ा देते हैं

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मुझको वो मेरे गुनाहों की सज़ा देते हैं,
पहले देते हैं ज़हर फिर वो दवा देते हैं |

खौफ़ दुनिया का उन्हें इश्क खता कहते हैं,
करके शोला ये बदन फिर क्यूँ हवा देते हैं |

इश्क करते हैं मगर सहर असर होने तक,
पहले देते हैं ज़ख्म फिर क्यूँ दुआ देते हैं |

बे-वफ़ा है वो मगर दिल है कि मानेगा नहीं,
उनके इंतखाब ये ज़ख्मों को हरा देते हैं |


अब तो कहता है 'हर्ष' खुद तू बगावत कर ले,
लोग यूँ ज़िन्द का दीया खुद ही बुझा देते हैं |


_______________हर्ष महाजन