Sunday, March 24, 2013

दो कदम रुक के चलो देख उनका गाम आया

...

दो कदम रुक के चलो देख उनका गाम आया,
बाद मुद्दत के आज फिर से मेरा  जाम आया |

ये कलम रूकती नहीं खुश हूँ खुदा खैर करे,
आज महबूब की ग़ज़ल में मेरा नाम आया |

बे-वफ़ा थे वो माना इश्क भी निभा न सके,
कसक को देख उनकी यूँ लगा मुकाम आया |

मैं सोया भी न था कि उनका अक्स आने लगा,
लगा यूँ मुझको उनके दिल से इक पैगाम आया |

हुआ था दर्द बहुत दिल पे जब चले थे कदम,
मगर वो ज़ियाद्ती भी रख के मैं तमाम आया |

_______________हर्ष महाजन