Monday, April 15, 2013

मेरी तुझसे जो मोहब्बत है कोई आम नहीं


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मेरी तुझसे जो मोहब्बत है कोई आम नहीं,
तेरे खत पढ़ न सकूं ऐसी कोई शाम नहीं |

मैंने ढूँढा है फकत तुझको सितारों में सनम,
पर इन हाथों की लकीरों में कोई नाम नहीं |

पलकों तक अश्क कोई गम में भी लाया न करो,
ये वो मोती हैं सनम जिनका कोई दाम नहीं |

गर जुदा रह के खुश तू, मैं भी चला जाऊँगा,
तेरे बिन दुनिया में मेरा भी कोई काम नहीं |

क्यूँ न मैय्यत मे जलाऊँ तेरी यादों के चिराग,
जहां भी देखेगा ऐसा कोई गुलफाम नहीं |

____________हर्ष महाजन