Saturday, May 4, 2013

आज की हसीनों से दामन छुडाएं कैसे हम

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__________एक गीत

आज की हसीनों से दामन छुडाएं कैसे हम,
झील सी आँखों में यूँ, डूब गए हों जैसे हम |

जुबां भी अब खामोश औ ये आँखें भी हुईं हैं नम,
दिल में हैं ज़ख्म बहुत भरेंगे कैसे-कैसे हम |

ये भीगी-भीगी पलकें हैं जो यादें उनकी झेलती,
तन्हा-शब्-ओ-तन्हा-गम झेलें कैसे-कैसे हम |

टुकड़ों में अब किया कतल बदल गए कातिल कई,
इन वक़्त की राहों को अब बदलें ऐसे-कैसे हम |

ये मेरी बदनसीबी कि न समझे वो न समझे हम,
यूँ रिश्तों पे पडा कफ़न ये भूलें ऐसे-कैसे हम |

____________________हर्ष महाजन |