Sunday, May 19, 2013

जो जुदा हुआ वो जालिम दिल जार-जार रोया

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जो जुदा हुआ वो जालिम दिल जार-जार रोया,
दे दी कसम जो उसने फिर ऐतबार रोया |

ये है बे-अदब क्यूँ दुनिया देती है दिल पे छाले,
ज्यूँ बदलते देखा साहिल दिल बार-बार रोया |

तेरी आशिकी पे हमने जो ढेरों थे गीत गाये ,
मैं तो धीरे-धीरे तनहा हो-कर बे-जार रोया |

खाईं जो कसमें तूने मोड देंगे रुख हवा का ,
जो कुचलते देखे अरमां दिल बनके खार रोया |

मेरी इल्तजा पे तूने जो कफ़न उठा के देखा,
मैंने अलविदा किया जो कर-कर दीदार रोया |

________________हर्ष महाजन