Friday, May 17, 2013

मेरे गुरु से पहली मुलाकात

...

वो अज़ीम शख्स मंच पर,
मुझे शायर कहने लगा |
मैं भीड़ में बगुले झांकता
यकदम......
आंसुओं में बहने लगा |
एक अद्भुत थी घटना ,
जिसे.. मैं सहने लगा |
फिर कुछ तारीफों के पुल
कुछ मेरी ही ग़ज़लें ..
और उनके मुखड़े बतियाने लगा
यूँ ही .......
इक इक कर
वो .....
मेरी धड़कने बढाने लगा |
मैं परेशां !!!!
मुझे बार-बार वो बुलाने लगा
नाम सुन !!!!!!!!
सर से पाँव तक
मुझे पसीना आने लगा |
देख मेरी हरकत ..
वो  मंच से
धीरे-धीरे नीचे आने लगा
ये हादसा अजीम था ....
मुझे तब से ....
मंच पर ले जाने लगा |
वो इक सुनहरा दिन  ...
जिस दिन से
'
हर्ष' उस शख्स का
अमूल्य
शिष्य कहलाने लगा |
वो 'चमन'
तब से ..
ये नया फूल
दिल से सहलाने लगा |
ये फूल बे-साख्ता
उस चमन में लहराने लगा |


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हर्ष महाजन |