Wednesday, June 26, 2013

आज उन्होंने अपना ऐतराज़ बुड्डों पर थोप दिया

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आज उन्होंने अपना ऐतराज़ बुड्डों पर थोप दिया,
कीमती जज़्ब-ओ-अंदाज़ उन चुनिंदों पर रोप दिया |
कैसे कहूँ लांग गए वो अपनी ही खींची लकीरों को,
बेवज़ह दर्दीला अहसास उन बाशिंदों को सौंप दिया |

_____________________हर्ष महाजन