Monday, July 1, 2013

तबाही का मंज़र उसने मोहब्बत में इस तरह देखा है

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तबाही का मंज़र उसने मोहब्बत में इस तरह देखा है,
कि ज़िंदगी और मौत में अब इक मामूली सी रेखा है |
रूठ-रूठ कर ज़िंदगी को बहुत जी लिया है उसने 'हर्ष',
पर कुदरत की किताब में उसका बस इतना ही लेखा है |

_____________________हर्ष महाजन |