Friday, July 12, 2013

हस्ती बना दिलों में तुम जहाँ से चल पड़े

R.I.P PRAN SAHEB .......Extremely saddened by the demise of the LEGENDARY PRANSAAB

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हस्ती बने दिलों में तुम जहाँ से चल पड़े,
  वो अश्क जहां रुके से थे वहां से चल पड़े |

लिखे थे तुमने परदे पर फ़साने बहुत मगर,
किरदार छुपे जहन में जहां-तहां से चल पड़े |

वफ़ा भी तुम निभा गए अपने चमन से खूब,
हुई मौत जरा सी बे-वफ़ा, जहाँ से चल पड़े |

न पूछो आज बज्मों में कोहराम मच गया,
आहों के सिलसिले जो अब यहाँ से चल पड़े |

सदियाँ हुई थी खुश्क हुए जो चश्म तिरे ‘हर्ष’
  अब काफिले ये अश्कों के कहाँ से चल पड़े |

____________हर्ष महाजन