Sunday, August 18, 2013

है ये ऐसा बंधन प्यार का जिसे याद कर घर आये तू

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रक्षाबंधन पर उतरे कुछ दिल के असल अहसास आपके हवाले
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है ये ऐसा बंधन प्यार का जिसे याद कर घर आये तू ,
कितना है उस धागे में प्यार खुद चेहरे से दिखलाये तू |


नन्ही कली फिर हुई बड़ी और अश्कों में फिर विदा हुई,
बाबुल तो यूँ ही चला गया ,कुछ चैन सुख बतलाये तू |


धागा है ये अपनी जगह , ये त्यौहार भी अपनी जगह,
तेरा हक सलामत अब भी है बाबुल से ज्यूँ इठलाये तू |


तू धागा जब जब बांधे है , तेरा अक्स माँ सा लागे है ,
मुझे बन्धनों से अगाह करे फिर स्नेह भाव समझाए तू |


ये जो रंग बिरंगी राखियाँ संग  अतीत की परछाइयां ,
  उन भूली बिसरी यादों संग खुशियों का रंग बिखराए तू |


___________________हर्ष महाजन