Tuesday, August 27, 2013

मैं तो अपने दर से बिछुड़ गया



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मैं तो अपने दर से बिछुड़ गया,
न सफ़र में था पर किधर गया |

यूँ ही करके खूँ अब भरोसे का,
वो गया, मगर न ज़हर गया |

मेरी भड़के आग तहरीरों में,  
जाने अब कहाँ वो हुनर गया |

न है रंज मुझे न शिकन कोई ,
अब ख़्वाबों से भी ज़िकर गया |

था चिराग दिल में जो बुझ गया,
जो भी ज़हन में था फिकर गया |

________हर्ष महाजन |