Sunday, November 10, 2013

है कोई दिल पे लिखे मेरे सवाल कोई


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है  कोई दिल पे लिखे मेरे सवाल कोई,
मैं तन्हा रहूँ हो न मुझे फिर मलाल कोई ।

करार-ए-ज़िंदगी में सफे अब भी खाली हैं,
उम्मीद है मिलेगा मुझे भी लिखवाल कोई ।

रुतबे का बहुत, असर तिरा,  मेरे शेरो में,
डर है मुझे उठ न जाए अब सवाल कोई ।

बे-वफ़ा का दर्द-ए-ज़ख्म मैं जानता हूँ खूब ,
इश्क़ के सफ़र में तुम रखना न ख्याल कोई ।

 है अच्छे अच्छे शायरों का लुत्फ़ लिया मैंने ,
मगर हुआ, न अब तलक, ऐसा इक़बाल कोई ।

बेहद किया, है प्यार तुझे, पर कह सका न मैं,
दिल जानता,  उठेगा अब, ज़रूर बवाल कोई ।

बहुत बार कबूला 'हर्ष'  ये इश्क़-ए-ज़ुर्म यहाँ  ,
जालिम जहॉं,  होता नहीं, यहाँ निहाल कोई ।

हर्ष महाजन