Saturday, November 16, 2013

मुझको हाथों की लकीरों में तो रह लेने दो



मुझको हाथों की लकीरों में तो रह लेने दो,
वर्ना हक़ से मुझे अश्क़ों में ही बह लेने दो ।

थक चुका हूँ मैं तेरी राहों को तकते-तकते,
अब बची है कोई सर्द लहर तो कह लेने दो ।

हमें ज़ख्मों ने पुकारा मगर था होश कहाँ,
कुछ वो दर्द तूने सहे कुछ मुझे सह लेने दो ।

मुझको पूछो न वफ़ा और ज़फ़ा के मायने,
मैं तो तेरा था तेरा हूँ…… तेरा रह लेने दो ।

मैं तो वो दीप हूँ दुनिया का कहर भी झेलूँगा,
मुझको रोको न ज़हर दिल में है कह लेने दो ।


___________हर्ष महाजन