Sunday, November 3, 2013

इल्तज़ा है कलम से यूँ ही तेरे लिए नए गीत बनाती रहे

न्म-दिन की दिली मुबारकबाद हो शेफाली शर्मा
खुदा तेरी उम्र दराज़ करे हज़ारों बरस
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इल्तज़ा है कलम से यूँ ही तेरे लिए नए गीत बनाती रहे ,
शब्दों को दे जन्म हर साल तेरा जन्म-दिन मनाती रहे ।

दुआओं की हर शाख पर रहे तू महफूज़ बस ये खुदा करे ,
इक बे-खौफ जिन्दगी तेरी रग -रग में अब मुस्कराती रहे ।

कुछ बुलन्दियाँ हैं जो छूना बाकि हैं शायद तुम्हे याद हों,
पल में दूर हो जाएंगी मुश्किलें जो भी तेरी राह आती रहें ।

सितारों का क्या है आसमां से यूँ ही उतर आते हैं तेरे लिए,
मनाएं वो जन्म-दिन तेरा बस महक हम तक आती रहे ।

____________________हर्ष महाजन