Sunday, December 1, 2013

आजकल अस्त-व्यस्त हो रहा हूँ मैं

!!!!!!-----मेरी फेसबुक----!!!!!!

आजकल अस्त-व्यस्त हो रहा हूँ मैं ,
शायद खुद में.....मस्त हो रहा हूँ मैं ।

फेसबुक पर, क्या खोया क्या पाया,
मनन कर अब ध्वस्त हो रहा हूँ मैं ।

कुछ मिले दोस्त यहाँ कुछ दुश्मन भी ,
छुट जायेंगे, सोच, पस्त हो रहा हूँ मैं ।

कर रहा हूँ शोध खुद कही तहरीरों का,
बस यूँ समझिये आश्वस्थ हो रहा हूँ मैं ।

वक़्त का अम्बार दिया है यहाँ मैनें,
शायद इसीलिए निरस्त हो रहा हूँ मैं ।

चाँद नहीं निकला रात भी ख़तम हुई ,
शायद सूरज सा, अस्त हो रहा हूँ मैं ।

कितना लगता था बुरा 'अलविदा' शब्द,
सही था, इसीलिए तटस्थ हो रहा हूँ मैं ।

आओ कुछ ऐसा कह दें उम्र भर याद रहे ,
कुछ कहूंगा ? सोच पस्त हो रहा हूँ मैं ।

___________हर्ष महाजन