Saturday, December 21, 2013

बे-वफ़ा हम तो न थे तुमने ऐतबार न किया



बे-वफ़ा हम तो न थे तुमने ऐतबार न किया,
बा-वफाई का ज़िकर हमने बार-बार न किया ।

मुझको छोड़ा भी नहीं, मुझको चाहा भी कहाँ,
कैसे समझूँ कि तूने इश्की कारोबार न किया ।

मेरी कश्ती में बता दे कोई दरार कहाँ,
मुझे डूबना ही तो था फिर भी इंतज़ार न किया ।

अब सवालों की तरह मुझको देखे है क्यूँ भला ,
है मुक़द्दर क्या मेरा, कोई भी बीमार न किया ।

टुकड़ों टुकड़ों में तूने दिल में ज़हर छोड़ दिया,
'हर्ष' बा-वफ़ा ही रहा उसने ऐतबार न किया ।

___________हर्ष महाजन