Sunday, February 2, 2014

दहलीज़ जहां पर मुर्दों ने आतंक बना अब छोड़ा है

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दहलीज़ जहां पर मुर्दों ने आतंक बना अब छोड़ा है,
संग कलम अहसास से अपने काट नया ये फोड़ा है ।

धरने पे धरना डाल यहाँ, लहू अमन का निचोड़ा है ,
नाल हटा दो खुरों की इनके,  नया-नया ये घोड़ा है ।

वोट बैंक पर घातक हमला, पुराने खिलाड़ी चूक गए ,
कलम करो सब झूठ सभी जो आम जनों में छोड़ा है ।

उठो शहीदो कब्र से अब तुम, भोगी नेता मुर्दार हुए ,

करो हिन्द आज़ाद तुम अपना, इनपे वक़्त भी थोडा है |
भ्रष्टाचार के नाम पे उठते आम जनों को देख लिया,
लूट लिया विश्वास वक़्त भी दिल हर जन का तोडा है ।

______________हर्ष महाजन