Monday, April 14, 2014

मैं तो अजनबी था फिर भी तुम हाथों में ढ़ूढते क्यूँ

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मैं तो अजनबी था फिर भी तुम हाथों में ढूँढ़ते क्यूँ ,
मैं तो खुद लकीर हाथों की बन तुझ में सज गया हूँ ।

______________हर्ष महाजन


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MaiN to ajnabi tha phir bhi tum haathoN meiN dhoodhte kyu,
MaiN to khud lakeer haathoN kii ban tujh meiN saj gaya huN.


________________Harash mahajan