Saturday, April 12, 2014

बहुत कायल हूँ मैं उसका, मगर बुलाना नहीं चाहता

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बहुत कायल हूँ मैं उसका, मगर बुलाना नहीं चाहता,
सच तो ये है दर्द की महफ़िल मैं सजाना नहीं चाहता ।

बहुत सोचता हूँ कहीं दफ़न कर दूँ  इन अहसासों को,
मगर इतना भी तो ज़ुल्म अब मैं ढाना नहीं चाहता ।

कुछ तो उसका भी हक है अपनी बात कहने का यहाँ,
फिर भी असल बात अब कोई मैं बताना नहीं चाहता ।

प्यार तो बहुत है आपस में कभी कहते है कभी नहीं,
मगर दिल से कोई भी बात मैं  छुपाना नहीं चाहता ।

गुलशन में गुलों को तोड़ना अच्छा नहीं लगता 'हर्ष',
मैं असल बात दुनिया को अब सुनाना नहीं चाहता ।

------------------हर्ष महाजन
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Bahut kaayal huN maiN uska magar bulaana nahiN chahta,
Sach to ye hai dard ki mehfil maiN sajana nahiN chahta.

Bahut Sochta huN kahiN dafan kar dooN in ehsaasoN ko,
Magar itna bhi to zulm ab maiN dhana nahiN chahta.

Kuch to uska bhi haq hai apni baat kehne ka,
Phir bhi asal baat ab koii maiN bataana nahiN chahta.

Pyaar to bahut hai aapas meiN kabhi kehte haiN kabhi nahiN,
Magar dil se koii bhi baat maiN chhupana nahiN chahta.

Gulshan meiN guloN ko todna acchha nahiN lagta 'Harash',
MaiN asal baat ab duniyaaN ko sunana nahiN chahta.

__________________Harash Mahajan