Sunday, May 11, 2014

जब सवालों में नज़र आने लगी

------माँ फ़क़त माँ------


जब सवालों में नज़र आने लगी,
माँ खुद मुझ से बतियाने लगी ।

अनगिनित सिलवटें लिए चेहरे पे,
वक़्त पे खा लिया कर बताने लगी।

किस तरह झांका दिल के दरीचों में,
हर आने वाली तकलीफ समझाने लगी ।

कब तक चलेंगे रिश्ते दूर दूर रह कर,
फिर ले ले सबका नाम दोहराने लगी ।

नहीं होता इक सा वक़्त बताया उसने,
इक पीड़ा थी चेहरे पे जिसे छुपाने लगी ।

कितना दर्द होता है फ़क़त एक दिन में,
सदियाँ लग जायेंगी कह कराहने लगी ।

___________हर्ष महाजन