Thursday, May 29, 2014

मैं वो पत्ता जिसे पतझड़ ने रिहायी भी न दी

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मैं वो पत्ता जिसे पतझड़ ने रिहायी भी न दी,
बता तू कैसा शज़र जिसने जुदायी भी न दी ।
ये दर्द ऐसा मिला जैसे.....अपना वो भी नहीं,
बता ये कैसा मुक़द्दर कि.....तन्हायी भी नहीं ।

-------------हर्ष महाजन