Tuesday, May 6, 2014

... जितने भी दे दे तू गम सब से गुज़र जाऊंगा,


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जितने भी देगी तू गम सब से गुज़र जाऊंगा,
गर ज़ख्म तुझको मिलेगा तो बिखर जाऊंगा ।
तू है माझी मैं मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का,
जब भी चाहेगी तू मुझसे मैं उतर जाऊंगा ।

--------–-हर्ष महाजन