Tuesday, May 6, 2014

किस तरह इक शख्स जो हमने उसे था मिला दिया


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 Kis tarah ik shaks jo hamne usey tha mila diya,
Ik umra ka rishta tha jo ab ajnabi sa bana diya.
Tazzub hua mujhko bhi ab wo yaar badle is tarah,
JyuN ho tawayaf shahar ki basti ko jung me dubaa diya

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किस तरह इक शख्स जो हमने उसे था मिला दिया,
इक उम्र का रिधता था जो अब अजनबी सा बना दिया ।
ताज्जुब हुआ मुझको भी अब वो यार बदले इस तरह.
ज्यूँ हो तवायफ शहर की बस्ती को जंग में दुबा दिया ।

---------------हर्ष महाजन