Tuesday, June 24, 2014

मेरे गुलिस्तान में खिलने को तो फूल बहुत

पुरानी डायरी से ......

मेरे गुलिस्तान में खिलने को तो फूल बहुत हैं,
कोई फूल तुझ सा भी हो.....तो कोई बात बने |

_________हर्ष महाजन